देश में खेती लगातार चुनौतियों से जूझ रही है। मौसम की मार, बढ़ती लागत, मजदूरों की कमी और बाजार में उचित दाम न मिलना किसानों की बड़ी समस्याएं हैं। ऐसे में किसानों के बच्चों को टेक्नोलॉजी से जोड़ना अब एक विकल्प नहीं बल्कि जरूरत बन चुका है। मोबाइल, इंटरनेट, स्मार्ट ऐप्स, ड्रोन, सेंसर और डेटा आधारित खेती किसानों को सटीक फैसले लेने में मदद करती है।
अगर किसान का बेटा या बेटी मौसम का पूर्वानुमान देख सके, मिट्टी की जांच रिपोर्ट समझ सके, मोबाइल ऐप से फसल की बीमारी पहचान सके और मंडी के सही भाव जान सके, तो खेती घाटे का सौदा नहीं रहेगी। टेक्नोलॉजी से जुड़कर किसान परिवार खेती को एक प्रोफेशनल बिजनेस की तरह चला सकता है।
सरकार भी डिजिटल एग्रीकल्चर, ई-नाम, ड्रोन दीदी, मृदा स्वास्थ्य कार्ड और पीएम किसान जैसी योजनाओं के माध्यम से तकनीक को बढ़ावा दे रही है। जरूरत है कि किसान अपने बच्चों को पढ़ाई के साथ-साथ आधुनिक कृषि तकनीकों से भी जोड़ें, ताकि खेती का भविष्य सुरक्षित और समृद्ध बन सके।
भारत एक कृषि प्रधान देश है, जहां आज भी बड़ी आबादी खेती पर निर्भर है। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में खेती आसान नहीं रही। मौसम का अनिश्चित व्यवहार, लागत में बढ़ोतरी, कीटनाशकों और खाद की महंगाई, पानी की कमी और बाजार में दामों का उतार-चढ़ाव किसानों की कमर तोड़ रहा है। ऐसे में परंपरागत तरीकों से खेती करना अब पर्याप्त नहीं है।
आज टेक्नोलॉजी हर क्षेत्र को बदल रही है और खेती भी इससे अछूती नहीं है। स्मार्टफोन, इंटरनेट और डिजिटल टूल्स ने खेती को वैज्ञानिक और डेटा आधारित बना दिया है। टेक्नोलॉजी की मदद से किसान यह जान सकता है कि कब बुवाई करनी है, कितनी सिंचाई जरूरी है, कौन-सी खाद सही रहेगी और फसल को कौन-सा रोग लग सकता है।
किसानों के बच्चे आज स्कूल और कॉलेज में पढ़ रहे हैं। वे मोबाइल और इंटरनेट से पहले से परिचित हैं। अगर उन्हें सही दिशा और कृषि तकनीक का ज्ञान दिया जाए, तो वे खेती में क्रांतिकारी बदलाव ला सकते हैं।
वे मोबाइल ऐप से मौसम की जानकारी ले सकते हैं
ऑनलाइन सरकारी योजनाओं का लाभ उठा सकते हैं
खेती का पूरा डेटा डिजिटल रूप से रख सकते हैं
आज कई ऐसे मोबाइल ऐप उपलब्ध हैं जो किसानों के लिए वरदान साबित हो रहे हैं। इन ऐप्स से:
फसल रोग की पहचान
मंडी भाव की जानकारी
मौसम का पूर्वानुमान
बीज और खाद की सही मात्रा
सरकारी योजनाओं की जानकारी
मिलती है।
ड्रोन से फसल की निगरानी, कीटनाशक छिड़काव और सर्वे किया जा सकता है। इससे समय, मेहनत और खर्च तीनों कम होते हैं। जीपीएस आधारित ट्रैक्टर और मशीनें खेत में सटीक काम करती हैं, जिससे ईंधन और समय की बचत होती है।
सेंसर आधारित सिंचाई सिस्टम यह बताता है कि खेत में नमी कितनी है। इससे जरूरत के अनुसार ही पानी दिया जाता है। इससे पानी की बचत होती है और फसल भी बेहतर होती है।
खेती में सबसे बड़ी कमी सही रिकॉर्ड की होती है। किसान के बच्चे अगर टेक्नोलॉजी जानते हों, तो वे:
लागत और मुनाफे का हिसाब
बीज, खाद और दवा का रिकॉर्ड
फसल उत्पादन का डेटा
डिजिटल रूप में रख सकते हैं। इससे भविष्य की योजना बनाना आसान होता है।
टेक्नोलॉजी से किसान सीधे ग्राहक से जुड़ सकता है। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए किसान अपनी उपज अच्छे दाम पर बेच सकता है। इससे बिचौलियों की भूमिका कम होती है और किसान को सही मूल्य मिलता है।
सरकार भी चाहती है कि किसान टेक्नोलॉजी से जुड़े। इसके लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं जैसे:
डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन
ई-नाम (राष्ट्रीय कृषि बाजार)
मृदा स्वास्थ्य कार्ड
ड्रोन दीदी योजना
पीएम किसान योजना
जरूरत है कि गांवों में कृषि प्रशिक्षण केंद्र खोले जाएं, जहां किसानों के बच्चों को आधुनिक खेती सिखाई जाए। स्कूल और कॉलेज स्तर पर एग्री-टेक को बढ़ावा दिया जाए।
अगर आज किसानों के बच्चों को टेक्नोलॉजी का ज्ञान दिया गया, तो आने वाले समय में खेती:
कम खर्च में ज्यादा मुनाफा देगी
युवाओं के लिए आकर्षक बनेगी
देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करेगी
खेती का भविष्य तकनीक और युवा सोच के साथ ही सुरक्षित है।