भारतीय कृषि आज संक्रमण के दौर से गुजर रही है। एक ओर जलवायु परिवर्तन, दूसरी ओर लागत में बढ़ोतरी ने किसानों को कठिन स्थिति में ला दिया है। कई किसान बिना मिट्टी परीक्षण के खेती करते हैं, जिससे फसल अपेक्षित उत्पादन नहीं दे पाती। कीटनाशकों के अत्यधिक प्रयोग से मिट्टी और पर्यावरण दोनों को नुकसान होता है। वहीं सिंचाई की पारंपरिक विधियां पानी की बर्बादी बढ़ाती हैं।
इस खबर में हम खेती से जुड़ी प्रमुख समस्याओं जैसे मिट्टी की कमजोरी, फसल रोग, जल संकट, बीज की गुणवत्ता और बाजार व्यवस्था पर विस्तार से चर्चा करेंगे। साथ ही, इनके समाधान जैसे मृदा परीक्षण, जैविक खेती, ड्रिप सिंचाई, फसल विविधिकरण और सरकारी सहायता योजनाओं की जानकारी भी देंगे। यह खबर किसानों के लिए एक मार्गदर्शक के रूप में उपयोगी साबित होगी।
भारत एक कृषि प्रधान देश है, जहां आज भी लगभग 50% आबादी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से खेती पर निर्भर है। लेकिन बदलते समय के साथ खेती की समस्याएं भी जटिल होती जा रही हैं।
लगातार एक ही फसल उगाने और रासायनिक खाद के अधिक प्रयोग से मिट्टी की सेहत खराब हो रही है।
समाधान:
हर 2–3 साल में मिट्टी परीक्षण
जैविक खाद, गोबर खाद, वर्मी कम्पोस्ट का प्रयोग
फसल चक्र अपनाना
कीट और रोग किसानों की सबसे बड़ी चिंता हैं।
समाधान:
एकीकृत कीट प्रबंधन (IPM)
नीम आधारित जैव कीटनाशक
रोग प्रतिरोधी किस्मों का चयन
जल संकट खेती को सबसे ज्यादा प्रभावित कर रहा है।
समाधान:
ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई
वर्षा जल संचयन
कम पानी वाली फसलें अपनाना
नकली बीज और महंगे इनपुट किसान को नुकसान पहुंचाते हैं।
समाधान:
प्रमाणित बीज
सरकारी बीज केंद्र
समूह में खरीद
उत्पादन के बाद सही दाम न मिलना बड़ी समस्या है।
समाधान:
FPO से जुड़ाव
e-NAM प्लेटफॉर्म
भंडारण और प्रोसेसिंग
👉 सही जानकारी, प्रशिक्षण और सरकारी योजनाओं के सही उपयोग से किसान इन समस्याओं से बाहर निकल सकता है।