सोयाबीन की खेती में अच्छी पैदावार पाने के लिए केवल बीज और खाद ही नहीं, बल्कि सही दवाओं का उपयोग भी बेहद जरूरी है। फसल की शुरुआती अवस्था से लेकर कटाई तक कई प्रकार के कीट, रोग और खरपतवार सोयाबीन को नुकसान पहुंचाते हैं। यदि समय रहते इनका नियंत्रण न किया जाए तो उत्पादन और गुणवत्ता दोनों प्रभावित होती हैं। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, सोयाबीन में इल्ली, तना छेदक, सफेद मक्खी और पत्ती खाने वाले कीट प्रमुख समस्या हैं, जबकि पीला मोजेक, चारकोल रॉट और पत्ती धब्बा जैसे रोग भी आम हैं। इसके अलावा खरपतवार फसल से पोषक तत्व छीन लेते हैं। इस समस्या से निपटने के लिए बाजार में कई प्रभावी कीटनाशक, फफूंदनाशक और खरपतवारनाशक उपलब्ध हैं। इस समाचार में सोयाबीन की खेती में उपयोग होने वाली प्रमुख दवाओं, उनके सही समय और सही मात्रा की विस्तृत जानकारी दी गई है, जिससे किसान अपनी फसल को सुरक्षित रखकर बेहतर मुनाफा कमा सकते हैं।
सोयाबीन भारत की एक महत्वपूर्ण तिलहनी फसल है, जिसकी मांग घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजार दोनों में लगातार बढ़ रही है। मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में बड़े पैमाने पर इसकी खेती की जाती है। सोयाबीन से तेल, पशु आहार और कई खाद्य उत्पाद तैयार किए जाते हैं। यही कारण है कि यह फसल किसानों की आय बढ़ाने में अहम भूमिका निभाती है।
सोयाबीन की खेती में सबसे बड़ी समस्या कीट, रोग और खरपतवार हैं। यदि किसान समय पर इनका प्रबंधन नहीं करते हैं तो 20 से 50 प्रतिशत तक फसल नुकसान हो सकता है।
मुख्य समस्याएं:
कीटों का प्रकोप
फफूंद और जीवाणु जनित रोग
खरपतवारों की अधिकता
मौसम में बदलाव
यह कीट फसल की पत्तियों को खाकर पौधे को कमजोर कर देता है।
उपयोगी दवाएं:
इमामेक्टिन बेंजोएट
स्पिनोसैड
क्लोरेंट्रानिलिप्रोल
छिड़काव समय:
फसल में कीट दिखाई देते ही।
यह कीट रस चूसकर पौधे को कमजोर करता है और रोग फैलाता है।
उपयोगी दवाएं:
थायमेथोक्सम
इमिडाक्लोप्रिड
यह पौधे के तने को नुकसान पहुंचाता है।
उपयोगी दवाएं:
फिप्रोनिल
क्विनालफॉस
यह रोग सफेद मक्खी के माध्यम से फैलता है।
नियंत्रण:
रोगग्रस्त पौधे निकालें
सफेद मक्खी नियंत्रण दवाएं
इस रोग में पौधा अचानक सूख जाता है।
दवाएं:
कार्बेन्डाजिम
टेबुकोनाजोल
पत्तियों पर भूरे धब्बे दिखाई देते हैं।
दवाएं:
मैंकोजेब
प्रोपिकोनाजोल
खरपतवार फसल के शुरुआती 30–40 दिनों में अधिक नुकसान पहुंचाते हैं।
प्रमुख दवाएं:
पेंडीमेथालिन (बुवाई के बाद)
इमाजेथापायर (खरपतवार उगने के बाद)
सही मात्रा का प्रयोग करें
एक ही दवा बार-बार न डालें
सुबह या शाम के समय छिड़काव करें
सुरक्षा उपकरण पहनें
कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि यदि किसान समेकित कीट प्रबंधन (IPM) अपनाएं, जैविक और रासायनिक दवाओं का संतुलित उपयोग करें और मौसम के अनुसार दवा का चयन करें, तो सोयाबीन की पैदावार में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है।
सोयाबीन की खेती में सही दवाओं का चयन और समय पर उपयोग किसानों के लिए लाभकारी सिद्ध हो रहा है। आधुनिक दवाओं और वैज्ञानिक सलाह के साथ किसान न केवल फसल को सुरक्षित रख सकते हैं, बल्कि अपनी आय भी बढ़ा सकते हैं। आने वाले समय में यदि किसान जागरूकता और तकनीक को अपनाते हैं तो सोयाबीन खेती ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ बन सकती है।