जैविक उद्यानिकी खेती वह कृषि प्रणाली है जिसमें फल, सब्जियां, फूल और मसालों की खेती बिना रासायनिक उर्वरक, कीटनाशक और खरपतवार नाशकों के की जाती है। इसमें प्राकृतिक संसाधनों का अधिकतम उपयोग किया जाता है ताकि मिट्टी, पानी और पर्यावरण को नुकसान न पहुंचे।
आज जब रासायनिक खेती के दुष्परिणाम सामने आ चुके हैं, तब जैविक खेती एक सुरक्षित और दीर्घकालिक समाधान के रूप में उभर रही है।
1. मिट्टी की उर्वरता में सुधार
जैविक खाद और प्राकृतिक तत्वों के उपयोग से मिट्टी में सूक्ष्म जीव सक्रिय रहते हैं, जिससे भूमि लंबे समय तक उपजाऊ बनी रहती है।
2. उत्पादन लागत में कमी
रासायनिक खाद और कीटनाशकों की जगह स्थानीय संसाधनों से बनी खाद का उपयोग करने से लागत घटती है।
3. बेहतर गुणवत्ता और अधिक दाम
जैविक फल-सब्जियों को बाज़ार में 20–40% तक अधिक कीमत मिलती है।
4. पर्यावरण संरक्षण
मिट्टी, जल और वायु प्रदूषण कम होता है, जिससे खेती टिकाऊ बनती है।
5. उपभोक्ताओं का भरोसा
स्वास्थ्य के प्रति जागरूक उपभोक्ता जैविक उत्पादों को प्राथमिकता दे रहे हैं।
सब्जियां: टमाटर, भिंडी, बैंगन, शिमला मिर्च, पालक
फल: आम, अमरूद, केला, पपीता, नींबू
मसाले व जड़ी-बूटियां: हल्दी, अदरक, तुलसी
फूल: गेंदा, गुलाब
भारत में जैविक उत्पादों का बाज़ार तेजी से विस्तार कर रहा है। बड़े शहरों में सुपरमार्केट, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और विशेष जैविक स्टोर खुल रहे हैं। निर्यात के स्तर पर भी भारतीय जैविक फल-सब्जियों की मांग यूरोप और खाड़ी देशों में बढ़ रही है।
किसान यदि सीधे उपभोक्ताओं या किसान उत्पादक संगठनों (FPO) के माध्यम से बिक्री करें, तो उन्हें और अधिक लाभ मिल सकता है।
परंपरागत कृषि विकास योजना (PKVY) – जैविक खेती को बढ़ावा
राष्ट्रीय बागवानी मिशन – प्रशिक्षण और तकनीकी सहायता
जैविक प्रमाणन सहायता – बाज़ार में भरोसे के लिए
ड्रिप सिंचाई सब्सिडी – जल संरक्षण के लिए
इन योजनाओं से किसानों को आर्थिक और तकनीकी सहयोग मिलता है।
मध्य प्रदेश के एक छोटे किसान ने 2 एकड़ जमीन पर जैविक सब्जियों की खेती शुरू की। शुरुआती दो वर्षों में उन्हें कम मुनाफा हुआ, लेकिन मिट्टी सुधरने के बाद उत्पादन और गुणवत्ता दोनों बढ़े। आज वे सीधे शहर के ग्राहकों को जैविक सब्जियां बेचकर सालाना लाखों रुपये कमा रहे हैं। उनका कहना है कि जैविक खेती ने उन्हें आत्मनिर्भर बनाया और सम्मान भी दिलाया।
जैविक उद्यानिकी खेती केवल एक खेती पद्धति नहीं, बल्कि एक संपूर्ण जीवनशैली है। यह किसानों की आय बढ़ाने, उपभोक्ताओं को सुरक्षित भोजन देने और पर्यावरण की रक्षा करने का सशक्त माध्यम है। सही जानकारी, सरकारी सहयोग और बाज़ार की समझ के साथ जैविक खेती किसानों के भविष्य को सुरक्षित और समृद्ध बना सकती है।