भारत की कृषि व्यवस्था देश की रीढ़ मानी जाती है। समय के साथ-साथ खेती के तरीकों में बड़ा परिवर्तन आया है। पहले जहाँ किसान केवल मौसम और अनुभव के आधार पर खेती करते थे, वहीं आज वैज्ञानिक अनुसंधान, तकनीक और डेटा आधारित खेती का दौर शुरू हो चुका है। यह बदलाव किसानों के लिए नई उम्मीद और बेहतर भविष्य लेकर आया है।
पिछले कुछ वर्षों में खेती में तकनीकी क्रांति देखने को मिली है। उन्नत बीज, मौसम पूर्वानुमान ऐप, मृदा स्वास्थ्य कार्ड और डिजिटल मार्केटिंग प्लेटफॉर्म ने खेती को अधिक व्यवस्थित और लाभकारी बनाया है। किसान अब यह जान पा रहे हैं कि किस समय कौन-सी फसल लगाना ज्यादा फायदेमंद रहेगा।
खेती में मशीनों का उपयोग तेजी से बढ़ा है। ट्रैक्टर, सीड ड्रिल, हार्वेस्टर और स्प्रे मशीनों ने श्रम की लागत कम की है और समय की बचत की है। छोटे और सीमांत किसानों के लिए कस्टम हायरिंग सेंटर एक बड़ा सहारा बने हैं, जहाँ वे कम खर्च में मशीनें किराए पर ले सकते हैं।
अनियमित बारिश और जल संकट के कारण सिंचाई एक बड़ी चुनौती बन गई है। ऐसे में ड्रिप और स्प्रिंकलर जैसी सूक्ष्म सिंचाई तकनीकें किसानों के लिए वरदान साबित हो रही हैं। इससे पानी की बचत होती है और फसल को जरूरत के अनुसार नमी मिलती है।
उन्नत और संकर बीजों के उपयोग से उत्पादन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। साथ ही किसान अब केवल एक ही फसल पर निर्भर न रहकर फसल विविधीकरण अपना रहे हैं। अनाज के साथ-साथ सब्जी, दलहन, तिलहन और नकदी फसलों की खेती से जोखिम कम हो रहा है।
फसल रोग और कीट किसानों के लिए हमेशा से चिंता का विषय रहे हैं। अब वैज्ञानिक सलाह और एकीकृत कीट प्रबंधन पद्धतियों के माध्यम से इन समस्याओं पर काफी हद तक नियंत्रण पाया जा रहा है। जैविक कीटनाशकों का प्रयोग भी तेजी से बढ़ रहा है।
डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए किसान बाजार भाव, मौसम की जानकारी और सरकारी योजनाओं की जानकारी तुरंत प्राप्त कर रहे हैं। इससे निर्णय लेना आसान हुआ है और बिचौलियों पर निर्भरता कम हुई है।
किसानों को सशक्त बनाने के लिए सरकार लगातार नई योजनाएं लागू कर रही है। फसल बीमा, न्यूनतम समर्थन मूल्य, सब्सिडी और प्रशिक्षण कार्यक्रम किसानों को आर्थिक और तकनीकी सहयोग प्रदान कर रहे हैं।
रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से पर्यावरण पर पड़ रहे दुष्प्रभावों को देखते हुए अब टिकाऊ खेती पर जोर दिया जा रहा है। प्राकृतिक और जैविक खेती न केवल पर्यावरण के लिए बेहतर है बल्कि लंबे समय में किसानों के लिए भी फायदेमंद साबित हो रही है।
आज का किसान नई चीजें सीखने और अपनाने के लिए तैयार है। प्रशिक्षण कार्यक्रमों, किसान मेलों और डिजिटल माध्यमों से उसे नई जानकारी मिल रही है। इससे खेती को एक व्यवसायिक दृष्टिकोण मिल रहा है।
खेती में हो रहे ये बदलाव भारतीय कृषि को नई दिशा दे रहे हैं। यदि किसान आधुनिक तकनीकों, सरकारी योजनाओं और बाजार की समझ का सही उपयोग करें, तो खेती न केवल आत्मनिर्भर बनेगी बल्कि किसानों की आय में भी स्थायी वृद्धि होगी। आने वाला समय भारतीय खेती के लिए नए अवसर और नई संभावनाएं लेकर आएगा।