भारत में खेती को लाभकारी बनाने की दिशा में किसान लगातार ऐसी फसलों की तलाश में रहते हैं, जो कम समय में बेहतर उत्पादन और अच्छा बाजार मूल्य दे सकें। इन्हीं फसलों में मक्का आज किसानों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रही है। मक्का की मांग न केवल भोजन के रूप में है, बल्कि पशु आहार, पोल्ट्री फीड, स्टार्च उद्योग और एथेनॉल उत्पादन में भी लगातार बढ़ रही है। यही कारण है कि मक्का की खेती किसानों की आमदनी बढ़ाने का एक मजबूत जरिया बन चुकी है।
मक्का की खेती का सबसे बड़ा लाभ यह है कि यह कम समय में तैयार होने वाली फसल है। लगभग 90 से 110 दिनों में फसल तैयार हो जाती है, जिससे किसान साल में एक से अधिक फसल लेने में सक्षम हो जाते हैं। इसके अलावा मक्का की खेती खरीफ, रबी और जायद—तीनों मौसमों में की जा सकती है।
मक्का के लिए गर्म और मध्यम आर्द्र जलवायु सबसे उपयुक्त मानी जाती है। 20 से 30 डिग्री सेल्सियस तापमान में मक्का की बढ़वार अच्छी होती है। मिट्टी की बात करें तो दोमट और बलुई दोमट मिट्टी, जिसमें जल निकास की अच्छी व्यवस्था हो, मक्का की खेती के लिए सर्वोत्तम रहती है।
अच्छी पैदावार के लिए खेत की तैयारी बहुत जरूरी है। खेत की 2–3 बार गहरी जुताई कर मिट्टी को भुरभुरा बनाया जाता है। अंतिम जुताई के समय सड़ी हुई गोबर की खाद मिलाने से उत्पादन में बढ़ोतरी होती है। मक्का की बुवाई खरीफ में जून–जुलाई, रबी में अक्टूबर–नवंबर और जायद में फरवरी–मार्च के दौरान की जाती है।
आज बाजार में मक्का की कई उन्नत और हाइब्रिड किस्में उपलब्ध हैं, जो सामान्य किस्मों की तुलना में अधिक उत्पादन देती हैं। सही किस्म का चयन किसान की आमदनी तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
मक्का की फसल को संतुलित मात्रा में नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश की आवश्यकता होती है। खाद को अलग-अलग चरणों में देने से फसल का विकास बेहतर होता है। सिंचाई के समय इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए कि खेत में पानी जमा न हो, क्योंकि जलभराव से फसल को नुकसान पहुंच सकता है।
मक्का की फसल में तना छेदक, फॉल आर्मीवर्म और पत्ती झुलसा जैसे रोगों का खतरा रहता है। समय पर निगरानी और उचित कीटनाशकों के प्रयोग से इन रोगों से बचाव किया जा सकता है।
मक्का की फसल जब पूरी तरह पक जाती है और भुट्टे सूखने लगते हैं, तब कटाई की जाती है। सामान्य किस्मों से 40–50 क्विंटल प्रति हेक्टेयर और हाइब्रिड किस्मों से 60–80 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उत्पादन संभव है। अगर लागत और बाजार भाव की बात करें तो किसान प्रति हेक्टेयर 40,000 से 80,000 रुपये तक का शुद्ध मुनाफा कमा सकते हैं।
सरकार किसानों को मक्का की खेती के लिए बीज सब्सिडी, फसल बीमा और कृषि यंत्रों पर अनुदान जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध करा रही है। इन योजनाओं का लाभ लेकर किसान अपनी लागत कम कर सकते हैं और मुनाफा बढ़ा सकते हैं।
मक्का की खेती आज किसानों के लिए केवल एक फसल नहीं, बल्कि आर्थिक मजबूती की दिशा में एक बड़ा कदम बन चुकी है। सही जानकारी, उन्नत तकनीक और सरकारी योजनाओं के सहयोग से मक्का की खेती किसानों की आय बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकती है।